Saturday, December 08, 2012

प्रत्यक्षा विदेशी निवेश - जनमत संग्रह

प्रत्यक्षा विदेशी निवेश के प्रश्न पर कुछ लोगों की सम्मति है कि इसे जनमत संग्रह के लिए रखा जाए।

जनमत संग्रह के सन्दर्भ में ये प्रश्न खड़े होते हैं :

1. इस बात का निश्चय कैसे और कौन करेगा की किन विषयों को जनमत संग्रह के लिए रखा जाना है? क्या भविष्य में इसके आधार पर आरक्षण, राम-मंदिर, मराठी-बिहारी विवादों के निर्णय की मांग नहीं रखी जायेगी? क्या भविष्य मैं संविधान संशोधन भी जनमत संग्रह से पारित करवाए जा सकेंगे?

2. क्या संविधान में इसका प्राविधान है, और क्या जनमत संग्रह द्वारा लिया गया निर्णय, स्वयंसिद्ध विधि (कानून) माना जायेगा? अथवा यह भी केवल सदन-बोध (सेंस ऑफ़ हाउस ) की तरह मजाक बनके रह जाएगा?

3. चुनावों की ही तरह, जनमत संग्रह में फिर से दलगत राजनीति द्वारा रस्सा कस्सी के चलते, गलत निर्णय सामने नहीं आएंगे ? अथवा किसी जनसँख्या - बाहुल्य क्षेत्र विशेष की प्राथमिकताएं देश की प्राथमिकताओं को प्रभावित नहीं करेंगी?

4. क्या डेढ़ अरब लोगों में जनमत संग्रह का खर्च, मूलभूत सुविधाओं की कीमत पर नहीं आयेगा?